बहराइच, 16 अक्टूबर 2025।
तहसील नानपारा के अंतर्गत सेटेलाइट रिमोट सेंसिंग के माध्यम से पराली जलाने की एक घटना की पुष्टि होने पर श्रीमति मोनालिसा जौहरी, उपजिलाधिकारी (एसडीएम) नानपारा ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्यवाही की। इस क्रम में एसडीएम ने तहसीलदार, सभी नायब तहसीलदारों और राजस्व निरीक्षकों की एक विशेष बैठक बुलाकर पराली जलाने पर प्रभावी नियंत्रण के लिए शासनादेश संख्या 1363531/बार-2099/66/2021-918/2024-कृषि अनुभाग-2 दिनांक 05 सितंबर 2024 के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए।
बैठक में एसडीएम श्रीमति जौहरी ने कहा कि फसल अवशेष या पराली जलाना पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी की उर्वरता घटती है और जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के सभी राजस्व ग्रामों में जाकर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करें। गांवों में चौपाल, स्कूल, पंचायत भवनों और प्रमुख स्थानों पर लाउडस्पीकर के माध्यम से संदेश प्रसारित कर लोगों को पराली न जलाने की अपील करें।
एसडीएम ने कहा कि शासन की मंशा पर्यावरणीय क्षति को रोकने और किसानों को वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ किसान उठाकर पराली को खेत में ही मिलाकर जैविक खाद के रूप में उपयोग कर सकते हैं। इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और अगली फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।
श्रीमति मोनालिसा जौहरी,एसडीएम नानपारा ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा चेतावनी के बाद भी पराली जलाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। संबंधित व्यक्ति पर अर्थदंड लगाया जाएगा, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति भी वसूली जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रशासन के पास सेटेलाइट और स्थानीय टीमों के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं की त्वरित जानकारी उपलब्ध होती है, जिससे दोषियों की पहचान आसानी से की जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में खंड विकास अधिकारियों और पूर्ति निरीक्षकों — बलहा, शिवपुर और नवाबगंज — को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राम प्रधानों, सचिवों और उचित दर विक्रेताओं के माध्यम से गांव-गांव में जन जागरूकता फैलाएं।
एसडीएम ने किसानों से अपील की कि पराली को जलाने के बजाय उसका सदुपयोग करें। उन्होंने कहा, “पराली जलाने से खेत की जैविक क्षमता घटती है और प्रदूषण से मानव जीवन पर भी गंभीर खतरे उत्पन्न होते हैं। इसलिए हर किसान को पर्यावरण की रक्षा में अपना योगदान देना चाहिए।”
उन्होंने यह भी बताया कि शासन द्वारा पराली प्रबंधन के लिए आधुनिक उपकरण, जैसे हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम और रीपर बाइंडर जैसी मशीनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पराली को बिना जलाए उपयोग में लाया जा सके।
श्रीमति मोनालिसा जौहरी,एसडीएम ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सतर्क रहें और सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में पराली जलाने की कोई घटना न हो। उन्होंने कहा कि यह न केवल शासन का आदेश है, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के हित में भी आवश्यक कदम है।
